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नई-दिल्लीः भारत बेशक प्रथाओं और परम्पराओं का देश है। यहां पर अलग-अलग धर्म और जगहों पर अनेक प्रथाएं प्रचलित हैं। लेकिन क्या आपने किसी ऐसी प्रथा के बारे में सुना है, जिसमें लड़कियों और औरतों की खरीद फरोख्त होती हो। वह भी दस रुपए के स्टाम्प पर। अगर नहीं तो हम आपको बता रहे हैं एक ऐसी ही प्रथा के बारे में जो कुप्रथा बन गयी है।

यह प्रथा है मध्य प्रदेश के शिवपुरी कि जो धड़ीचा प्रथा के नाम से प्रचलित है। औरतों की खरीद फरोख्त की इसी प्रथा की शिकार कल्पना अब तक दो पति बदल चुकी है। और दो साल से दूसरे पति रमेश के साथ रह रही है। इसी तरह रज्जो पहले पति को छोड़कर अब दूसरे पति के साथ है। 

दरअसल यहां प्रथा की आड़ में गरीब लड़कियों का सौदा होता है और उनकी मंडी लगती है। इसमें पुरुष अपनी पसंदीदा औरत की बोली लगाते हैं। सौदा तय होने के बाद बिकने वाली औरत और खरीदने वाले पुरुष के बीच अनुबंध किया जाता है और यह अनुबंध 10 रुपये से लेकर 100 रुपये तक के स्टाम्प पर किया जाता है।

बता दे कि घटता लिंगानुपात इसका मुख्य कारण है। एक अनुमान के मुताबिक यहां हर साल करीब 300 से ज्यादा महिलाओं को दस से 100 रूपये तक के स्टांप पर खरीदा और बेचा जाता है। और शर्त के अनुसार खरीदने वाले व्यक्ति को महिला को एक निश्चित रकम देना पड़ता है। रकम अदा करने के बाद, रकम के अनुसार महिला निश्चित समय के लिए उस व्यक्ति की बहू या पत्नी बन जाती है।

रकम ज्यादा होने पर संबंध स्थाई या फिर संबंध खत्म हो जाते हैं। फिर अनुबंध खत्म होने के बाद लौटी महिला का दूसरे के साथ सौदा कर दिया जाता है। कई बार इसे सरकार के समक्ष उठाया गया। लेकिन, महिलाएं या पीड़ित सामने नहीं आती हैं। जिस कारण यह प्रथा चल रही है।

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