जम्मू बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव के विडियो जारी करके घटिया खाना दिए जाने और अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के बाद बहस शुरू हो गई है। एक तरफ जहां कुछ लोगों ने दावा किया है कि कुछ अफसर राशन और अन्य चीजें गांवों में आधी कीमत पर बेच देते हैं, वहीं कुछ पूर्व सैनिकों ने खराब खाना परोसे जाने की खबर को खारिज किया है।

बीएसएफ से रिटायर तेजिंदर सिंह ने कहा, ‘खबरों में जिस तरह का खराब खाना बताया जा है, वैसा कभी भी नहीं परोसा गया। अगर यह बहुत अच्छा नहीं है तो यह खराब या घटिया क्वॉलिटी का तो बिलकुल नहीं है।’ तेजिंदर के मुताबिक, सेना नियंत्रित इलाके में फॉरवर्ड पोजिशंस पर तैनात जवान इंडियन आर्मी की डायट चार्ट के हिसाब से खाना पाते हैं। मेन्यू बेहद शानदार भले न हो, लेकिन साधारण और अच्छा होता है।

सर्विस में तैनात बीएसएफ के एक जवान बलविंदर सिंह ने कहा, ‘हमें जो खाना मिलता है, वो औसत है, लेकिन खराब तो बिलकुल नहीं है।’ उन्होंने बताया, ‘सेना की हर कंपनी एक क्वॉर्टरमास्टर और मेस इन्चार्ज की नियुक्ति करती है, जो कंपनी के जवानों के खानपान के लिए जिम्मेदार होते हैं।’

नक्सल प्रभावित इलाके में तैनात एक अन्य जवान ने कहा कि हो सकता है कि यादव के आरोप उनके निजी पसंद पर आधारित हों। जवान के मुताबिक, ‘हमारे मेस का खाना एवरेज है, लेकिन इतना बुरी नहीं जितना कि तेज बहादुर बता रहे हैं।’ इंटरनैशनल बॉर्डर पर तैनाती की तुलना में लाइन ऑफ कंट्रोल पर सेवाएं देना बेहद मुश्किल होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि मौसम और इलाका, दोनों ही चुनौतियां पैदा करते हैं। फिर भी राशन सभी को मिलता है। अच्छी क्वॉलिटी का यह राशन अच्छी मात्रा और विकल्पों के तौर पर उपलब्ध होता है।’

गुवाहाटी बीएसएफ फ्रंटियर के एक अफसर ने कहा कि हर जवान को 2905 रुपये रुप ये का राशन मिलता है। उन्होंने कहा, ‘मेन्यू तय करते वक्त यह ध्यान रखा जाता है कि जवान को दिनभर का काम करने के लिए जरूरी कैलोरीज मिल सकें।’

बीएसएफ के एक सूत्र ने कहा, ‘बेहद कम मामलों में ही सुदूर इलाकों में तैनात जवानों को तयशुदा मेन्यू के हिसाब से खानापीना नहीं मिल पात क्योंकि लैंड स्लाइड्स और प्राकृतिक आपदाएं बाधा पहुंचाती हैं। हालांकि, ऐसा सिर्फ ज्यादा से ज्यादा दो से तीन दिन चलता है और सप्लाई वापस से दुरुस्त हो जाती है।’

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